21 नै कोनी लगदा कुरुक्षेत्र म सूर्यग्रहण का मेला कर्फ्यू के हालात

कोविड 19 वैश्विक महामारी की वजह त इस बार हरियाणा के कुरुक्षेत्र म 21 तारीख दिन इतवार आषाढ़ माह की मौस नै सूर्यग्रहण का मेला कोनी लगदा ।त इस बार सोसल डिस्टनसिंग राखदे होये आपणे आपणे घरां ए सूर्य ग्रहण के टेम पूजा पाठ करियो।

कर्फ्यू काल रात 9 बजे शुरू हो लिया स 21 नै शांझ नै 6 बजे तक रवेगा।

2019 का सूर्यग्रहण मेला इस बार नजारा ना दिखै न्यू

सूर्यग्रहण कोनी लगदा 21 तारीख नै

Jai Dada Khede Ki


सारे दुखडे भुलजया हम तेरी चौखट पै आकै
पहला pyar मात पिता दूजा तू अपणा सा लागै
शाम सवेरे तेरे Darshan करलयू चढकै नै मंडेरे
सुख शांति की बखशीश देंदा रहिये मेरे दादा खेडे


Monu Paul✍✍

राखी बांधते समय ‘येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबल:’ का श्लोक क्यों कहा जाता है ?

राखी बांधते समय ‘येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबल:’ का श्लोक क्यों कहा जाता है ?

बात उस समय की हैंनिब राजा बलि अश्वमेध यज्ञ करा रहे थे और विष्णु प्रतिरूप वामन अवतार ने छल से तीनों लोक दान में ले लिए । तीन पनग दिन के उपरांत राजा बलि को पटेल नगरी का राजा बना दिया। किंतु राजा बलि ने कहा ‘ है प्रभु मैं पटेल नगरी में रहने के लिए सिद्ध हूँ लेकिन मेरी एक शर्त हैं भगवान अपने भक्तों की बात कभी नही टालते । ‘ अतः वामन देव ने शर्त पूरी करने का वचन दिया ‘ राजा बलि ने कहा : जब भी साइन जाऊं जग कर उठूं वे जहां भी दृष्टि पड़े आपको जी पाऊँ ‘ यह सुन वुष्णु देव अपना माथा ठोककर कहने लगे मैं जीतकर भी हार गया इसने तो मुझे अपना प्रहरी बना लिया । लेकिन अब वे वचन देकर भवँर में फस चुके थे। अतः राजा बलि के साथ पाताल नगरी में ही रहने लगे।

इधर लक्ष्मी जी को उनकी चिंता सताने लगी। तभी नारद जी पधारे ओर भेद बताया सारा कैसे राजा बलि से जीते फिर जीती बाजी हारे । वचन बध हो कर भवँर में फँसे। कैसे बने जग के रखवाले राजा बलि के प्रहरी ? तब लक्ष्मी जी ने नारद से युक्ति पूछी कैसे वो अपने पति को पा सकती हैं ? तब नारद जी ने कहा आप राजा बलि को अपना भाई बना लो और रक्षा वचन ले और पहले त्रिवाचा करवाकर दक्षिणा में विष्णुजी को माँग लेना !

तब लक्ष्मी जी ने एक सुंदर स्त्री का रुआ धारण किया और पाताल नगरी पहुँच रोने लगी । राजा बलि ने पूछा : क्यो रो रही हैं आप ? लक्ष्मी जी ने कहा मेरा कोई भाई नही है इसलिए मैं बहुत दुखी हूँ !तब राजा बलि ने उनको धर्म की बहन बना लिया। इर लक्ष्मी जी ने तिर्बाचा कराया इर वचन में उनसे प्रहरी माँग लिया ।।
यह सुनकर बलि सोचने लगे, “धन्य हो माता बहन बनकर आये सब कुछ लें गये और ये महारानी ऐसी आयीं कि अपने पति को ही लें गयीं |”
तब से हिब रक्षाबन्धन की शुरुआत हुई थी इसलिए कलावा बांधते समय मंत्र बोला जाता हैं


येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबल: |
तेन त्वाम् प्रतिबद्धनामि रक्षे माचल माचल:।”


अर्थात् जिस रक्षासूत्र से राजा बलि को बांधा गया था, उसी रक्षाबंधन से मैं तुम्हें बांधता हूं, जो तुम्हारी रक्षा करेगा |  हे रक्षासूत्र तुम चलायमान न हो, चलायमान न हो । धर्मशास्त्र के विद्वानों के अनुसार इसका अर्थ यह है कि रक्षा सूत्र बांधते समय बहन अपने भाई को कहती है कि जिस रक्षासूत्र से दानवों के महा पराक्रमी राजा बलि धर्म के बंधन में बांधे गए थे अर्थात् धर्म में प्रयुक्त किए गए, उसी सूत्रसे मैं तुम्हें बांधता हूं, अर्थात् धर्म के लिए प्रतिबद्ध करता हूं । इसके पश्चात् बहन रक्षासूत्र से कहती है कि हे रक्षे, तुम स्थिर रहना, स्थिर रहना । इस प्रकार रक्षासूत्र के माध्यमसे बहन अपने भाईयों को धर्मपथ पर चलने हेतु प्रेरित कर उस पर अडिग रहने की सीख दती है ।

Balivaishv Dev Yagya

बलिवैश्व देव यज्ञ

यह सभी यज्ञों का राजा कहलाता हैं। सभी जीवों , मनुष्यों , पशुओं , किट पतंगों आदी का निर्माण प्रकृति की रक्षा के लिए किया गया हैं। इनकी रक्षा करना भोजन एवं अन्य महत्वपूर्ण चीजे प्रधान करना ही बलि वैश्व देव यज्ञ कहलाता हैं।

बलिवैश्व देव यज्ञ का अर्थ
●बलि – उपहार ,
●वैश्व- समस्त विश्व के लिए,
●देव- दिव्य व श्रेष्ठ प्रयोजनों के लिए ,
●यज्ञ – अग्नि के माध्यम से सूक्ष्मीकृत कर पहुंचाना।
●दिव्य व श्रेष्ठ प्रयोजनों के लिए समस्त विश्व को  अग्नि देवता की मदद से सूक्ष्मीकृत करके उपहार पहुंचाना
● कण कण में शुभ मन्त्रो की वाइब्रेशन पहुंचाना।

ऋग्वेद में लिखा गया श्लोक : ॐ प्रिय श्रद्धते ददत: प्रिय श्रध्दे दिदासतः। प्रिय भोजेष यज्वसविद्म उचितं कधी ।।

अर्थात जजो व्यकि श्रद्धा से अन्न वस्त्र ज्ञान देता हैं उसका सदैव भला होता हैं। जिसके पास दान हेतु कुछ नहीं फिर भी दान करने की श्रद्धा रखता हैं उसका भी भला ही होता हैं। श्रद्धा और विश्वास पर दुनिया अटकी हैं। ब्रह्म ओर ॐ कक लंबे उच्चारण से सब सफ़ल होता हैं।

यज्ञ के बारे में कुछ तथ्य :

जब मनुष्य की रचना हुई तो उसे समृद्ध व सुखी बनाने का एक उपक्रम यज्ञ सौंपा गया। ब्रह्मा जी ने कहा यदि यज्ञ नित्य करोगे तो सृष्टि का कल्याण व पोषण होगा। जिससे घर घर में सर्वत्र शुभ मन्त्रो की वाइब्रेशन फैलेगी जो शुभ तत्वों को चुम्बक की तरह आकर्षित करेगी और मानव मात्र का कल्याण करेगी। जब तक घर घर में नित्य यज्ञ मनुष्य के जीवन का अंग था मनुष्य सुखी था, जब यज्ञ जीवन मे बन्द हो गया डिप्रेशन(तनाव) एवं अवसाद ने घर में डेरा डाल दिया। प्रेम सहकार घर से विदा हो गया और बिखरते रिश्ते व टूटते मन की समस्या घर घर हो गयी।

पृथ्वी की तरह हमारे विचारो में भी गुरुत्वाकर्षण होता है। निरन्तर मंन्त्र जप व बलिवैश्व यज्ञ से हमारे अंदर सद्बुद्धि, विवेकदृष्टि जागृत होती है। घर मे भगवान को यज्ञ द्वारा भोग लगाने से भोजन प्रसाद बन जाता है जो सत्कर्म और भावों की पवित्रता के लिए हमारे दिमाग़ में गुरुत्वाकर्षण-चुम्बकत्व पैदा होता हैं। जिसके प्रभाव से ब्रह्मांड में व्याप्त सादृश्य विचार, शक्ति और प्रभाव हमारे भीतर प्रवेश करते हैं।

हम जैसे विचारों का गुरुत्वाकर्षण-आकर्षण-चुम्बकत्व पैदा करते है, धीरे धीरे हम वैसा करने लगते है और एक दिन हम वैसे बन जाते है। इसलिए अच्छे मंन्त्र जप से हम अच्छे इंसान बनते हैं। यह ब्रह्माण्ड गूगल सर्च की तरह है, जैसे विचार मंन्त्र जप द्वारा सर्च करोगे वैसे समान विचार-प्रभाव-शक्तियां तुम तक पहुंचेगा।

Corona Ft. Ragni by Gurmeet Mann Ballah

वैद्य डाक्टर हार लिए, मिलया इसका कोए उपचार नहीं।
एकमात्र सै इलाज इसका,थाम लिकड़ो घर तै बाहर नहीं ।।

दूर देश तै चलकै आई,या ओड मुसीबत भारी,
सारी दुनिया आगै करली,सै घणी कसूती बीमारी,
आप बचो और देश बचाओ,ये हुक्म होए सरकारी,
जै इसपै हम काबू पागे,या दुनिया पै जीत सै म्हारी।
लाड प्यार तै राखो कुणबे नै,और करणी घर म्हं तकरार नहीं।।

कितणे मार दिए,कितणे मारेगी,इसका कोए अनुमान नहीं,
जै इसकी चपेट म्हं चढगे,तै बख्शी जागी जान नहीं,
कुछ दिन घरां टिकल्योगे तै,के बाजै थारी तान नहीं,
समझदारी दिखाण का टैम सै,जाणकै बणो अनजान नहीं ।
मिलकै हरा दो करोना नै,तू साले भारत नै स्वीकार नहीं ।

कोए हल जरूर लिकड़ैगा,इतनै अपणा फर्ज निभाओ,
साफ-सफाई का ध्यान रखो,और शुद्ध सात्विक खाओ,
दूर तै राखो राम रमी सबकी,किसे तै मत ना हाथ मिलाओ,
एकांत म्हं रहकै,एहतियात बरतोगे तै बिल्कुल मत घबराओ,
ये परहेज निभाओगे तै,करोना की बसावै फेर पार नहीं।

लापरवाह होणा नहीं सै,कुछ दिन म्हं आपे ढीला सौदा होज्यागा,
इस वैश्विक महामारी का,परहेज रूपी,औषधि पौधा होज्यागा,
ज्ञान रूपी अमर बेल कै आगै,रूख अज्ञान का बोदा होज्यागा,
मेहर सिंह प्रणाली म्हं गुरमीत मान,तेरा भी छोटा सा औधा होज्यागा।
सहज सहज आज्यागा लिखणा,इबे होवै घणा बेकरार नहीं।

दादा खेड़ा स्थल पर इतवार का दृश्य

दादा खेड़ा जी , बल्ला


चरणों मे तेरी ज्योत जगावे हो दादा खेड़े महाराज
तेरे चरणा म्ह शीश जुकावै हो दादा खेड़े महाराजा
गाम बल्ला के बीचोंबीच विराजै
धौली ध्वजा लहरावै जब गाम के मुकुट ज्यूँ साझै
घर से सबके ध्वजा दे है दिखाई
छत पर चढ़कर करें शांझ सुबह प्रणाम मेरे भाई
नर नारी सब मन्नत मांगे नीलगिरी की बल्ली  चढ़ावे
कारज सिद्ध जावैं जब बल्ली को गंगाजल से मल मल नहलावैं
गुड़ पतासे ज्योत चढ़ावे
भेदभाव से दूर हटे सब
जय जय कार लगावै

कहानी सरदार जी की

बन्दा जिस हाल में था
फट्टे थे कपड़े
हाथ मे सिक्के खुले
ऊपर घोर आसमान
नीचे जमीं पर सरदार जी की दुकान
दुकान का नाम “गुरुघर”
ओर पेट गरीब का
भरे गुरु घर
तो खाना लँगर बन जाये
सिक्के का कोई मोल नहीं
जब गुरु खुद खिलाये ।

बल्ला गाँव स्थित कुँए से जुड़े रोचक तथ्य

करीब 500 साल से भी अधिक पुराना हैं । 1895 से पूर्व कुएं पर छतरी नही थी 1958 में कुएं के पुनर्निर्माण के बाद छतरी बनाई गई । कुँए पर अंग्रेजी में “जय हिन्द” ओर ” डोन्ट वाश क्लॉथ ” भी लिखा गया हैं। कुँए पर कई नकशासि भी उकेरी गई है कुछ सालों पहले इसमें पानी चोवा था अभी प्रदूषण के कारण खत्म हो गया । 1958 के बाद वर्ष 2017-18 में मरमत दोबारा की गई हैं । पहले गेरू मिट्टी थी अब पेंट के साथ सजाया गया हैं।

कुँए से जुड़ा एक सबसे महत्वपूर्ण जानकारी :


सालवन गांव की एक लड़की भात न्योन्दणे आपने गाँव गई भाई नै होने के कारण उसे नकार दिया गया । वापसी पर वह रस्ते में बैठी थी तो गांव से एक भई उस बहन को गांव लेकर आया । तब गांव वालों ने फैशला लिया कि भात गांव भरेगा सारा । तो भेली घर घर नही जा सकती थी तब भेली गांव लेकर आई गई और भेली को कुँए मैं डाल दिया गया। भेली कुएं में डली ओर घर घर पानी बाँट दिया गया ! भात गांव बल्ला वालो ने भरा ओर सालवन गांव की उस लड़की ने इस प्यार प्रेम में सालवन गांव मे जो ज़मीन बल्ला गांव को दी गई ।

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