वैद्य डाक्टर हार लिए, मिलया इसका कोए उपचार नहीं।
एकमात्र सै इलाज इसका,थाम लिकड़ो घर तै बाहर नहीं ।।
दूर देश तै चलकै आई,या ओड मुसीबत भारी,
सारी दुनिया आगै करली,सै घणी कसूती बीमारी,
आप बचो और देश बचाओ,ये हुक्म होए सरकारी,
जै इसपै हम काबू पागे,या दुनिया पै जीत सै म्हारी।
लाड प्यार तै राखो कुणबे नै,और करणी घर म्हं तकरार नहीं।।
कितणे मार दिए,कितणे मारेगी,इसका कोए अनुमान नहीं,
जै इसकी चपेट म्हं चढगे,तै बख्शी जागी जान नहीं,
कुछ दिन घरां टिकल्योगे तै,के बाजै थारी तान नहीं,
समझदारी दिखाण का टैम सै,जाणकै बणो अनजान नहीं ।
मिलकै हरा दो करोना नै,तू साले भारत नै स्वीकार नहीं ।
कोए हल जरूर लिकड़ैगा,इतनै अपणा फर्ज निभाओ,
साफ-सफाई का ध्यान रखो,और शुद्ध सात्विक खाओ,
दूर तै राखो राम रमी सबकी,किसे तै मत ना हाथ मिलाओ,
एकांत म्हं रहकै,एहतियात बरतोगे तै बिल्कुल मत घबराओ,
ये परहेज निभाओगे तै,करोना की बसावै फेर पार नहीं।
लापरवाह होणा नहीं सै,कुछ दिन म्हं आपे ढीला सौदा होज्यागा,
इस वैश्विक महामारी का,परहेज रूपी,औषधि पौधा होज्यागा,
ज्ञान रूपी अमर बेल कै आगै,रूख अज्ञान का बोदा होज्यागा,
मेहर सिंह प्रणाली म्हं गुरमीत मान,तेरा भी छोटा सा औधा होज्यागा।
सहज सहज आज्यागा लिखणा,इबे होवै घणा बेकरार नहीं।