Balivaishv Dev Yagya

बलिवैश्व देव यज्ञ

यह सभी यज्ञों का राजा कहलाता हैं। सभी जीवों , मनुष्यों , पशुओं , किट पतंगों आदी का निर्माण प्रकृति की रक्षा के लिए किया गया हैं। इनकी रक्षा करना भोजन एवं अन्य महत्वपूर्ण चीजे प्रधान करना ही बलि वैश्व देव यज्ञ कहलाता हैं।

बलिवैश्व देव यज्ञ का अर्थ
●बलि – उपहार ,
●वैश्व- समस्त विश्व के लिए,
●देव- दिव्य व श्रेष्ठ प्रयोजनों के लिए ,
●यज्ञ – अग्नि के माध्यम से सूक्ष्मीकृत कर पहुंचाना।
●दिव्य व श्रेष्ठ प्रयोजनों के लिए समस्त विश्व को  अग्नि देवता की मदद से सूक्ष्मीकृत करके उपहार पहुंचाना
● कण कण में शुभ मन्त्रो की वाइब्रेशन पहुंचाना।

ऋग्वेद में लिखा गया श्लोक : ॐ प्रिय श्रद्धते ददत: प्रिय श्रध्दे दिदासतः। प्रिय भोजेष यज्वसविद्म उचितं कधी ।।

अर्थात जजो व्यकि श्रद्धा से अन्न वस्त्र ज्ञान देता हैं उसका सदैव भला होता हैं। जिसके पास दान हेतु कुछ नहीं फिर भी दान करने की श्रद्धा रखता हैं उसका भी भला ही होता हैं। श्रद्धा और विश्वास पर दुनिया अटकी हैं। ब्रह्म ओर ॐ कक लंबे उच्चारण से सब सफ़ल होता हैं।

यज्ञ के बारे में कुछ तथ्य :

जब मनुष्य की रचना हुई तो उसे समृद्ध व सुखी बनाने का एक उपक्रम यज्ञ सौंपा गया। ब्रह्मा जी ने कहा यदि यज्ञ नित्य करोगे तो सृष्टि का कल्याण व पोषण होगा। जिससे घर घर में सर्वत्र शुभ मन्त्रो की वाइब्रेशन फैलेगी जो शुभ तत्वों को चुम्बक की तरह आकर्षित करेगी और मानव मात्र का कल्याण करेगी। जब तक घर घर में नित्य यज्ञ मनुष्य के जीवन का अंग था मनुष्य सुखी था, जब यज्ञ जीवन मे बन्द हो गया डिप्रेशन(तनाव) एवं अवसाद ने घर में डेरा डाल दिया। प्रेम सहकार घर से विदा हो गया और बिखरते रिश्ते व टूटते मन की समस्या घर घर हो गयी।

पृथ्वी की तरह हमारे विचारो में भी गुरुत्वाकर्षण होता है। निरन्तर मंन्त्र जप व बलिवैश्व यज्ञ से हमारे अंदर सद्बुद्धि, विवेकदृष्टि जागृत होती है। घर मे भगवान को यज्ञ द्वारा भोग लगाने से भोजन प्रसाद बन जाता है जो सत्कर्म और भावों की पवित्रता के लिए हमारे दिमाग़ में गुरुत्वाकर्षण-चुम्बकत्व पैदा होता हैं। जिसके प्रभाव से ब्रह्मांड में व्याप्त सादृश्य विचार, शक्ति और प्रभाव हमारे भीतर प्रवेश करते हैं।

हम जैसे विचारों का गुरुत्वाकर्षण-आकर्षण-चुम्बकत्व पैदा करते है, धीरे धीरे हम वैसा करने लगते है और एक दिन हम वैसे बन जाते है। इसलिए अच्छे मंन्त्र जप से हम अच्छे इंसान बनते हैं। यह ब्रह्माण्ड गूगल सर्च की तरह है, जैसे विचार मंन्त्र जप द्वारा सर्च करोगे वैसे समान विचार-प्रभाव-शक्तियां तुम तक पहुंचेगा।

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