राखी बांधते समय ‘येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबल:’ का श्लोक क्यों कहा जाता है ?

राखी बांधते समय ‘येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबल:’ का श्लोक क्यों कहा जाता है ? बात उस समय की हैंनिब राजा बलि अश्वमेध यज्ञ करा रहे थे और विष्णु प्रतिरूप वामन अवतार ने छल से तीनों लोक दान में ले लिए । तीन पनग दिन के उपरांत राजा बलि को पटेल नगरी का राजाContinue reading “राखी बांधते समय ‘येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबल:’ का श्लोक क्यों कहा जाता है ?”

दादा खेड़ा स्थल पर इतवार का दृश्य

चरणों मे तेरी ज्योत जगावे हो दादा खेड़े महाराजतेरे चरणा म्ह शीश जुकावै हो दादा खेड़े महाराजागाम बल्ला के बीचोंबीच विराजैधौली ध्वजा लहरावै जब गाम के मुकुट ज्यूँ साझैघर से सबके ध्वजा दे है दिखाईछत पर चढ़कर करें शांझ सुबह प्रणाम मेरे भाईनर नारी सब मन्नत मांगे नीलगिरी की बल्ली  चढ़ावेकारज सिद्ध जावैं जब बल्लीContinue reading “दादा खेड़ा स्थल पर इतवार का दृश्य”

कहानी सरदार जी की

बन्दा जिस हाल में थाफट्टे थे कपड़ेहाथ मे सिक्के खुलेऊपर घोर आसमाननीचे जमीं पर सरदार जी की दुकानदुकान का नाम “गुरुघर”ओर पेट गरीब काभरे गुरु घरतो खाना लँगर बन जायेसिक्के का कोई मोल नहींजब गुरु खुद खिलाये ।

दादा खेड़ा

” यो दादा सर्व भूतेषु , खागड़ रूपेण संसिथ्तनमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो: नमः ।। “ दादा खेड़े का हर जगह वास हैं , प्रायः गांव में खागड़ / बूढ़े खागड़ में दादा खेड़े का वास बताया गया हैं । देखा भी गया हैं कि एक बूढ़ा बैल हर रोज गांव के लगभग हर घर सेContinue reading “दादा खेड़ा”

राजा बलि ओर गाँव बल्ला का इतिहास

महाराजा बलि सप्तचिरजीवियों में से एक, पुराणप्रसिद्ध विष्णुभक्त, दानवीर, महान्‌ योद्धा, थे । दैत्यराज बलि जिसकी राजधानी महाबलिपुर थी। महाराजा बलि ने अपना 100वां यज्ञ कहाँ किया महाराजा बलि ने तीनों लोकों पर विजय प्राप्त कर ली थी । वे अपने जीवन काल का 100वां अखण्ड यज्ञ कर रहे थे । यज्ञ के दौरान वामन रूपी विष्णुContinue reading “राजा बलि ओर गाँव बल्ला का इतिहास”

Design a site like this with WordPress.com
Get started